सिद्धिदात्री

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सिद्धि प्रदान करने वाली माँ सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्रि के नौवें दिन की जाती है ।
सिद्धि’ का शाब्दिक अर्थ है – ‘पूर्णता’। असामान्य कौशल या क्षमता अर्जित करने को पंचतंत्र में ‘सिद्धि’ कहा गया है।
सांख्यकारिका तथा तत्व समास में, अर्थात तांत्रिक बौद्ध सम्प्रदाय में इसका विशिष्ट अर्थ है – चमत्कारिक साधनों द्वारा ‘अलौकिक शक्तियों का अर्जन’ ; जैसे – दिव्यदृष्टि, उड़ना, एक ही समय में दो स्थानों पर उपस्थित होना, अपना आकार परमाणु की तरह छोटा कर लेना, पूर्व जन्म के घटनाओं की स्मृति प्राप्त कर लेना, आदि। माध्वाचार्य के सर्वदर्शनसंग्रह में भी ‘सिद्धि’ इसी अर्थ में प्रयुक्त हुई है।
हिन्दू धर्म में मान्य आठ सिद्धियाँ हैं-

1.) अणिमा– जिससे साधक किसी को दिखाई नहीं पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ में प्रवेश कर जाता है।

2.) महिमा– जिसमें योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।

3.) गरिमा– जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।

4.) लघिमा– जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।

5.) प्राप्ति– जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।

6.) प्राकाम्य– जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी में समा सकता है, आकाश में उड़ सकता है।

7.) ईशित्व– जिससे सब पर शासन का सामर्थ्य हो जाता है।

8.) वशित्व– जिससे दूसरों को वश में किया जाता है